सावन खत्म होने से पहले ही प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। देश में प्याज की राष्ट्रीय औसत खुदरा कीमत करीब 42 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि दिल्ली में कई जगह यही कीमत 65 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गई है। थोक बाजार में भी प्याज के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसकी बड़ी वजह मांग बढ़ना नहीं, बल्कि रबी की पुरानी फसल का स्टॉक खत्म होना और खरीफ की नई फसल आने में देरी है। महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश और

ओलावृष्टि से पुराने स्टॉक की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। वहीं मानसून में देरी के कारण खरीफ प्याज की बुआई और सप्लाई पर असर पड़ा है। बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतार रही है। साथ ही नासिक से देश के बड़े शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ भी चलाई जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक सितंबर-अक्टूबर तक कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

