छुट्टी के दिन प्रधानाध्यापक ने श्रमदान कर सड़क के गड्ढे भरे |

छुट्टी के दिन प्रधानाध्यापक ने श्रमदान कर सड़क के गड्ढे भरे |

पाकुड़-राजग्राम मुख्य मार्ग पर बाहिरग्राम कांटा के समीप जर्जर सड़क और जानलेवा गड्ढों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए नबीनगर उत्क्रमित उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक शमशेर आलम ने रविवार की छुट्टी के दिन अनूठी मिसाल पेश की। प्रशासनिक पहल का इंतजार करने के बजाय उन्होंने मजदूर के साथ मिलकर स्वयं श्रमदान किया और सड़क के खतरनाक गड्ढों को भरवाया। यह मुख्य मार्ग झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है। इस सड़क से मालपहाड़ी के पत्थर उद्योग क्षेत्र से पत्थर लदे भारी वाहनों का लगातार आवागमन होता है। वहीं, गंभीर मरीजों को रेफर किए जाने पर इसी मार्ग से पश्चिम बंगाल ले जाया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से सरकार को भारी मात्रा में राजस्व और रॉयल्टी प्राप्त होती है, इसके बावजूद सड़क की स्थिति लंबे समय से बेहद खराब बनी हुई है।

गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।प्रधानाध्यापक शमशेर आलम ने बताया कि कुछ समय पहले बारिश के दौरान इसी मार्ग से गुजरते हुए उनकी बाइक का पहिया अचानक गड्ढे में उतर गया था। उन्होंने कहा उस दिन वे दुर्घटना का शिकार होने से बाल-बाल बचे। तभी महसूस हुआ कि अगर समय रहते इन गड्ढों को नहीं भरा गया तो किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है और किसी की जान भी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि रविवार की छुट्टी को समाजहित में उपयोग करने के उद्देश्य से उन्होंने स्वयं कुदाल उठाई और मजदूर के सहयोग से सड़क के गड्ढों को भरवाया। उन्होंने कहा, केवल अपने लिए जीना ही जीवन नहीं है। समाज के प्रति भी हमारी कुछ जिम्मेदारियां हैं। प्रधानाध्यापक ने स्थानीय युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों से भी अपील की कि वे समाजहित के कार्यों में आगे आएं और अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास से सड़क जैसी समस्याओं का अस्थायी समाधान करने के साथ-साथ संबंधित विभाग और प्रशासन तक भी समस्या को मजबूती से पहुंचाया जा सकता है।प्रधानाध्यापक के इस प्रयास की स्थानीय लोगों ने सराहना की और कहा कि यदि जनप्रतिनिधि एवं संबंधित विभाग भी सड़क की स्थायी मरम्मत की दिशा में पहल करें तो दुर्घटनाओं पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाया जा सकता है।