हजारीबाग स्थित विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि) को ‘सेंटर फॉर डिसेबिलिटी स्टडीज’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस दिशा में विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला की शुरुआत की है। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय अब ऐसे शिक्षार्थियों को मुख्यधारा में जोड़ने पर विशेष ध्यान देगा, जिन्हें विशिष्ट अधिगम अक्षमता होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी इस प्रकार के समावेशन पर जोर दिया गया है। कुलपति ने बताया कि कार्यशाला में लगभग 50 प्रतिभागियों की छोटी टीम तैयार की जा रही है, जिन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में विकसित कर ‘सक्षमता-दूत’ बनाया जाएगा। यह टीम आगे स्कूलों और कॉलेजों में

जाकर शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगी। कार्यक्रम में ‘द कॉमनवेल्थ ऑफ़ लर्निंग – CEMCA’ के निदेशक डॉ. बशीरहमद शडरेख ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए विभावि की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह देश का पहला विश्वविद्यालय हो सकता है जो इस दिशा में संगठित कार्य कर रहा है। उन्होंने दिव्यांगता के लिए डिजिटल सपोर्ट, सुलभता, समायोजन और आकलन व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों में अपार प्रतिभा होती है और सही अवसर मिलने पर वे भविष्य के बड़े वैज्ञानिक और रचनात्मक व्यक्तित्व बन सकते हैं। कार्यशाला के पहले दिन तीन तकनीकी सत्रों का भी आयोजन किया गया और संसाधन सेवी विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया।

