हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के आदिवासी बहुल गांव चलकरी कला, जरवा और चुरचू में किसान अब रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। National Bank for Agriculture and Rural Development समर्थित ‘जीवा’ परियोजना के तहत जन जागरण केंद्र ग्रामीणों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने में जुटा है। किसान अब नीम, गोमूत्र, गुड़ और घरेलू संसाधनों से जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशक तैयार कर रहे हैं। इससे खेती की लागत घट रही है और फसल की गुणवत्ता बेहतर हो रही है। गांवों में बायो रिसोर्स सेंटर और

सामुदायिक सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं, जहां किसानों को खेती से जुड़ी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। नाबार्ड की डीडीएम ऋचा भारती ने कहा कि प्राकृतिक खेती आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का माध्यम है। वहीं जन जागरण केंद्र के सचिव संजय कुमार सिंह ने कहा कि संस्था का उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर बनाना है। ग्रामीण किसानों का कहना है कि प्राकृतिक खेती से अब खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि सम्मानजनक रोजगार बनती जा रही है।

