राजीव घई ने Operation Sindoor की पहली सालगिरह पर इसे भारत की रणनीतिक यात्रा का निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में बड़ा बदलाव था। पूर्व DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के 11 एयरफील्ड और 9 बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर भारी नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने दावा किया कि भारत ने अपने किसी भी सैन्य संसाधन को नुकसान नहीं होने दिया और आखिरकार पाकिस्तान ने ही कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के तहत 9 स्टैंडऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक की गई थीं, जिनमें 7 भारतीय सेना और 2 Indian Air Force द्वारा अंजाम दी गईं। इस दौरान ब्रह्मोस और आकाश जैसी स्वदेशी मिसाइलों,

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और निगरानी प्रणालियों ने अहम भूमिका निभाई। राजीव घई ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि आत्मनिर्भर भारत सिर्फ नारा नहीं, बल्कि देश की ताकत है।” उन्होंने बताया कि इस अभियान में जमीन, हवा और समुद्र तीनों मोर्चों पर संयुक्त क्षमता का इस्तेमाल किया गया। पूर्व DGMO के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान खुफिया एजेंसियां, साइबर यूनिट, सीमा सुरक्षा बल और अन्य सुरक्षा संगठन पूरी तरह समन्वय में थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इतना दबाव में आ गया था कि उसने भारत से संघर्ष रोकने की अपील की। जानकारी के अनुसार, इस अभियान में पाकिस्तान और POK में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के ठिकानों को निशाना बनाया गया था, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे। राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अब वैश्विक स्तर पर सैन्य और रणनीतिक योजना का “गोल्ड स्टैंडर्ड” माना जा रहा है।

