हस्तशिल्प कलाकार हमारे हीरो हैं ,,पद्मश्री उमाशंकर पांडे जल योद्धा, जल बीमा करें जीवन,बीमा नहीं, बोकारो,, में गांधी शिल्प बाजार का भव्य शुभारंभ, जल योद्धा पद्मश्री उमाशंकर पांडे ने किया इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हस्त शिल्प कला भारत की धरोहर है बुनकर भाइयों की वजह से हमें अभी हाथ के बुने हुए कपड़े मिलते हैं गांव में अभी यह धरोहर जिंदा है कृषि और कपड़े के क्षेत्र में आज भी सर्वाधिक रोजगार मिलता है राज्य स्तरीय गांधी शिल्प बाजार हस्तशिल्प प्रदर्शनी एवं बिक्री मेला का शुभारंभ बड़े उत्साह और गरिमा के साथ किया गया। यह आयोजन 19 से 28 फरवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें देशभर से आए कारीगर अपनी पारंपरिक कला और हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन एवं बिक्री कर रहे हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन पूरी देश दुनिया में जल योद्धा के नाम से प्रसिद्ध पद्मश्री सम्मानित उमाशंकर पांडेय द्वारा फीता काटकर किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और ऐसे आयोजनों से कारीगरों को नई पहचान और प्रोत्साहन मिलता है। इस अवसर पर अमेय साठे, प्रधान संपादक, शत्रुधन कुमार, सहायक निदेशक, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय, देवघर (झारखंड); संजय कुमार सिंह, सचिव, जन जागरण केंद्र; सुप्रिया पॉल, राज्य पुरस्कार प्राप्त हस्तशिल्पी, झारखंड; अश्विनी कुमार, मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी, बिरसा क्राफ्ट;

तथा भूपेंद्र उपाध्याय सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मेले में लकड़ी, बांस, मिट्टी, धातु, जूट एवं हस्तनिर्मित वस्त्रों सहित विभिन्न प्रकार के पारंपरिक उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई है। बड़ी संख्या में लोग स्टॉलों का भ्रमण कर स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं। यह आयोजन न केवल कारीगरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को भी सशक्त रूप से आगे बढ़ा रहा है। गांधी शिल्प बाजार बोकारो के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अमेय साठे ने कहा पूरी दुनिया में जल का संकट है पानी बनाया नहीं जा सकता कैबल बचाए जा सकता प्रसन्नता की बात है कि बोकारो के डीसी इस दिशा में अच्छा प्रयास कर रहे हैं बोकारो के जल संकट से निपटने के लिए भविष्य में एक बड़ी पानी की पाठशाला राज समाज सरकार सहयोग से आम जन की भागीदारी के साथ एक सामूहिक प्रयास का आयोजन होगा यह अच्छी पहल है और हम उनका स्वागत करते भविष्य की युवा पीढ़ी को हमें जल ज्ञान की शिक्षा देनी होगी जल से ही सारी पूजा होती है जल् जगदीश है जल ही जगन्नाथ है और पानी ही परमेश्वर ऐसा हमारा धर्म शास्त्र करता है हमें पानी की एक-एक बूंद बचानी होगी

