देश के लोकतंत्र का मंदिर, संसद भवन में माइक विवाद फिर चर्चा में है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के भाषणों के दौरान माइक बंद होने के आरोपों ने बहस को गरमा दिया है। लोकसभा में माइक का नियंत्रण सीधे स्पीकर या सचिवालय की तकनीकी टीम के पास होता है। नियम के अनुसार केवल वही सदस्य बोल सकते हैं जिन्हें अध्यक्ष ने अनुमति दी हो। समय सीमा, असंसदीय भाषा या अव्यवस्था के कारण माइक बंद किया जा सकता है।

हाल ही में राहुल गांधी ने डोकलाम और पूर्व थल सेनाध्यक्ष नरवणे की किताब पर चर्चा की, इसके दौरान माइक बंद होने का विरोध किया गया। विपक्ष का कहना है कि इससे उनकी आवाज दबाई जा रही है, जबकि सत्तापक्ष इसे तकनीकी प्रक्रिया मानता है। लोकतंत्र की मजबूती इस बात में है कि सदन में हर सदस्य की बात सुनी जाए।

