आज जब हम मैदान की ओर देखते हैं, तो हमें केवल खिलाड़ी नहीं दिखतीं, बल्कि वे बेटियाँ दिखती हैं जिन्होंने सामाजिक सीमाओं को चुनौती दी, कठिन परिस्थितियों में अपने सपनों को जीवित रखा और हॉकी को अपना जुनून व पहचान बनाया। महिला हॉकी अब केवल खेल नहीं, बल्कि नारी सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय महिला हॉकी टीम की उपलब्धियों ने देश की लाखों बेटियों को यह विश्वास दिया है कि वे भी आगे बढ़ सकती हैं, नेतृत्व कर सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ा सकती हैं।

झारखंड की खेल और युवा मामलों की मंत्री कल्पना सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य बेटियों के लिए खेल का मैदान सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसरों वाला बनाना है। वह चाहती हैं कि हर लड़की बिना किसी डर और भेदभाव के खेल सके और अपने भविष्य का निर्माण कर सके।

