
संसद में विपक्षी दलों ने मोदी सरकार की नई श्रम संहिताओं के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि नई संहिताएँ मजदूर-विरोधी हैं और दलालों का पक्ष लेती हैं। मुख्य चिंताएँ नौकरी की सुरक्षा, कार्य समय, कमजोर ट्रेड यूनियन, स्थायी आदेशों की कमी और सुरक्षा व कल्याण में गिरावट से संबंधित हैं। संहिता प्रवासी और अनौपचारिक श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपायों में विफल रही है। विपक्ष ने चेताया कि 300 से कम कर्मचारियों वाली इकाइयाँ नियमों से बाहर रहेंगी, और उल्लंघनों पर जवाबदेही कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि इससे श्रमिकों की मूलभूत अधिकारों और सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा होगा।

