हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गीता और भारतीय सेना की हाल की कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत लड़ाई नहीं चाहता, लेकिन यदि मजबूर किया गया तो यह लड़ाई से पीछे नहीं हटेगा। ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत की आत्म-प्रतिबद्धता, आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति थी। राजनाथ सिंह ने बताया कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन, कर्म और नेतृत्व का मार्गदर्शक है। गीता हमें संघर्ष से निपटने की शक्ति, इमोशनल

इंटेलिजेंस और अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि भारत आज एक विराट कर्मभूमि है, जहां सैनिक, किसान, वैज्ञानिक और युवा अपने-अपने क्षेत्रों में धर्म और कर्तव्य निभा रहे हैं। उन्होंने गीता को भारतीय मैनेजमेंट का प्राचीन और प्रभावी मॉडल बताते हुए कहा कि शक्ति और शांति विरोधी नहीं हैं; शांति तभी टिकती है जब आत्मविश्वास और बल मौजूद हो।

