राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में 65वें राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय पाठ्यक्रम के संकाय और पाठ्यक्रम सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक भाईचारा और शांति भारत की आस्था के मूलमंत्र रहे हैं, लेकिन राष्ट्र और मानवता के लिए हानिकारक ताकतों को परास्त करने हेतु युद्ध के लिए सदैव तैयार रहना भी उतना ही आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों को प्रेरित किया कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक शांति के संतुलन को बनाए रखने में योगदान दें।

