अनुराग बसु की “मेट्रो…इन दिनों” एक इमोशनल मोज़ेक है, जो रिश्तों की उलझनों, अधूरी कहानियों और मानसून की उदासी को एक साथ बुनती है। फिल्म में कोंकणा सेन शर्मा और पंकज त्रिपाठी की कहानी सबसे मजबूत है, जो शादी के भीतर की चुप्पियों को बारीकी से दर्शाती है। सारा अली खान और आदित्य रॉय कपूर का रिश्ता जटिल और अनिश्चित है — सारा बेहतर हुई हैं, लेकिन आदित्य की परफॉर्मेंस चमकती है। अली फजल और फातिमा सना शेख का टूटा रिश्ता असहज मगर सच्चा लगता है। नीना

गुप्ता और अनुपम खेर अपनी मासूम सी केमिस्ट्री से सुकून देते हैं। फिल्म का संगीत आत्मा की तरह बहता है, और सिनेमैटोग्राफी जैसे किसी याद को जीने जैसा है। “मेट्रो…इन दिनों” परफेक्ट नहीं, लेकिन बेहद सजीव है — जैसे ज़िंदगी खुद। अगर आप धीमी, भावनात्मक फिल्में पसंद करते हैं, तो यह अनुभव आपके लिए खास रहेगा।

