1957 में शिकागो यूनिवर्सिटी से भारत आकर स्वामी सहजानंद सरस्वती के किसान आंदोलन पर शोध करने वाले प्रो. वाल्टर हाउजर की अस्थियां गुरुवार को उनके परिवार ने पटना में गंगा नदी में प्रवाहित कीं। उनके साथ उनकी पत्नी रोजमेरी हाउजर के भी अस्थि अवशेष थे। दोनों की अंतिम इच्छा थी कि उनकी अस्थियां गंगा में ही प्रवाहित हों। हाउजर परिवार के साथ उनके पुत्र, पुत्रवधू, पुत्री और नातिन भी भारत आए।

इस अवसर पर उनके पूर्व छात्र और शोधकर्ता भी मौजूद रहे। अस्थि विसर्जन के बाद बिहटा स्थित श्री सीताराम आश्रम में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जिसमें बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत कई नेता, किसान संगठन और शिक्षाविद शामिल हुए। स्वामी सहजानंद सरस्वती की 75वीं पुण्यतिथि के दिन यह आयोजन हुआ, जिससे यह क्षण और भी ऐतिहासिक बन गया। प्रो. हाउजर ने सहजानंद की कई पुस्तकों का अनुवाद भी किया और जीवन भर भारत और बिहार से जुड़ाव बनाए रखा।

