
वाराणसी में फोरलेन सड़क परियोजना के तहत ऐतिहासिक और लोकप्रिय दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर गरज उठा। मंगलवार देर रात की इस कार्रवाई में शहर की पहचान बनी ‘पहलवान लस्सी’ और ‘चाचा की कचौड़ी’ सहित करीब 30 दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन ने बताया कि ये दुकानें अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में थीं और उन्हें पूर्व में नोटिस देकर हटाने की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश और भावनात्मक माहौल देखने को मिला। उनका कहना है कि ‘पहलवान लस्सी’ और ‘चाचा की कचौड़ी’ सिर्फ दुकानें नहीं, बल्कि वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत थीं। लोगों की यादें, स्वाद और पहचान इनसे जुड़ी हुई थीं। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सड़क विस्तार योजना जनहित में है और इसे तय समय सीमा में पूरा करना ज़रूरी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन दुकानदारों के पुनर्वास के लिए क्या कदम उठाता है, और क्या शहर अपनी पहचान के इन हिस्सों को खोने का दर्द सह पाएगा।

