सड़क नहीं तो वोट नहीं! रौसा गांव के ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार का ऐलान |

सड़क नहीं तो वोट नहीं! रौसा गांव के ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार का ऐलान |

सड़क नहीं बनी तो वोट नहीं! रौसा गांव के ग्रामीणों का ऐलान, वर्षों से बुनियादी सुविधाओं का इंतजार

150 घरों की बस्ती सड़क, नाली और आवास जैसी सुविधाओं से वंचित, ग्रामीणों ने बरकट्ठा विधायक पर लगाया अनदेखी का आरोप; एंबुलेंस तक नहीं पहुंचने का दावा हजारीबाग। चुनाव के दौरान विकास के वादे और चुनाव के बाद बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार। बरकट्ठा विधानसभा क्षेत्र के रौसा गांव की स्थिति ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। करीब 150 घरों की इस बस्ती में आज भी सड़क, नाली, पेयजल और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। उन्होंने स्पष्ट ऐलान किया है कि सड़क नहीं बनी तो आगामी चुनाव में वोट नहीं देंगे। पगडंडी जैसे रास्ते से आवागमन की मजबूरी ग्रामीणों के अनुसार गांव की सड़क की स्थिति बेहद खराब है। जगह-जगह गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। युवा संजय कुमार दास ने बताया कि सड़क की बदहाली के कारण सरकारी एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। उन्होंने सड़क के अभाव में कई लोगों की जान जाने की बात भी कही। ग्रामीण बालक प्रकाश मेहता ने बताया कि सड़क की समस्या वर्षों पुरानी है। भुवनेश्वर मेहता के कार्यकाल में कुछ स्थानों पर मिट्टी-मोरम डाला गया था, लेकिन उसके बाद निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि बरकट्ठा विधायक से कई बार मांग करने के बावजूद केवल आश्वासन मिला।
वहीं जयकी प्रसाद मेहता ने कहा कि खराब सड़क के कारण लोगों का सामान्य आवागमन भी मुश्किल हो गया है। चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गांव आते हैं और वादे करते हैं, लेकिन बाद में समस्याएं जस की तस रह जाती हैं।महिलाओं को भी आवागमन में परेशानी

गांव की बुजुर्ग महिला सुखी मियादार ने बताया कि लंबे समय से सड़क की स्थिति खराब है। रास्ते में गिरने और चोट लगने की घटनाएं होती रहती हैं। महिलाओं ने बताया कि गांव के चारों ओर जंगल और झाड़ियां हैं। रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से आवागमन में डर बना रहता है। जंगली हाथियों के कारण खेती-किसानी भी प्रभावित होती है। हाथी मक्का और धान की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। 150 घरों में महज 10 परिवारों को आवास का लाभ ग्रामीणों ने सरकारी योजनाओं के लाभ में भी अनदेखी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि करीब 150 घरों वाले गांव में मुश्किल से 10 परिवारों को ही इंदिरा आवास या प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है। शेष परिवार अब भी पक्के मकान के इंतजार में हैं। ग्रामीणों के अनुसार जनता दरबार में कई बार आवेदन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इसके अलावा गांव में नाली, पेयजल, स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाओं की कमी भी बताई गई। कुछ ग्रामीणों ने पात्र होने के बावजूद मंईयां सम्मान योजना और वृद्धावस्था पेंशन का लाभ नहीं मिलने की शिकायत की। बरकट्ठा विधायक और प्रशासन से पहल की मांग ग्रामीणों ने बरकट्ठा विधायक पर गांव की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए सांसद अन्नपूर्णा देवी और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। समाजसेवी ने भी गांव की समस्याओं को उठाते हुए सड़क, प्रधानमंत्री आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। ग्रामीणों का दो टूक संदेश लगातार उपेक्षा का आरोप लगा रहे ग्रामीणों ने अब चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। अब वे पहले सड़क निर्माण चाहते हैं, उसके बाद ही मतदान पर विचार करेंगे। रौसा गांव की समस्याएं ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल खड़े करती हैं। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की मांग पर जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन कब तक ठोस पहल करते हैं।