रानीगंज की 130 वर्ष पुरानी सोलहआना मां दुर्गा की विसर्जन शोभायात्रा बुधवार देर शाम पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नगर परिक्रमा करते हुए संपन्न हुई। प्रजापति दुर्गा के नाम से प्रसिद्ध मां को विदाई देने के लिए शहर की सड़कों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। स्थानीय मान्यता है कि इस प्रतिमा के विसर्जन के बाद ही रानीगंज में दुर्गोत्सव की औपचारिक समाप्ति होती है। विसर्जन से पहले महिलाओं ने पूजा-अर्चना और आरती की। इसके बाद सिंदूर खेला की रस्म निभाई गई। श्रद्धालुओं ने मां को बेटी की तरह भावपूर्ण विदाई दी। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजे

और संथाली वाद्ययंत्रों की धुन के बीच निकली शोभायात्रा में बंगाल की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। सामाजिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। शोभायात्रा में रानीगंज के विधायक पार्थ घोष शामिल हुए। उन्होंने इस आयोजन को शहर की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बताया। वही आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष मां के आगमन और विदाई से जुड़े प्रतीकों को भी झांकियों में प्रदर्शित किया गया। आस्था, परंपरा और जनभागीदारी के साथ संपन्न हुई यह शोभायात्रा रानीगंज की ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक बनी रही।

